१० दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला
लिपि एवं पाण्डुलिपि विज्ञान Banner | Infromation
वित्तीय सहायता - केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
आयोजक - प्राच्यविद्या संशोधन एवं प्रशिक्षण केन्द्र, श्री सोमनाथ संस्कृत युनिवर्सिटी, वेरावल
दिनांक - ०३ से १२ जुलाई, २०२५
कार्यशाला की विशेषता
* भारतीय प्राचीन लिपियों का इतिहास एवं विकास
* पाण्डुलिपियों की लेखनशैली/लेखनपद्धति
* पाण्डुलिपियों में वर्णों के लेखन के साम्य-वैषम्य का ज्ञान
* वर्णों के लेखन का प्रशिक्षण एवं अभ्यास
* पाण्डुलिपि-वाचन का प्रशिक्षण एवं अभ्यास
* अप्रकाशित पाण्डुलिपियों की सम्पादनपद्धति एवं सिद्धान्तों का विस्तृत मार्गदर्शन
आवश्यक सूचनाएँ
* पंजीकरण की लिंक - https://forms.gle/1Zbjh2wGVRBTTj6g8
* पंजीकरण शुल्क मात्र- रू.५००/-
* वर्ग का समय प्रतिदिन (रविवार के साथ) प्रातः १०.०० से ०१.०० एवं दोपहर ०२.३० से ०५.३०
* शास्त्री-आचार्य कक्षा के छात्र, शोधछात्र, प्राध्यापक इत्यादि भाग ग्रहण कर सकते हैं
* बाहर से आने वाले प्रशिक्षार्थियों के लिए निःशुल्क आवास तथा भोजन की व्यवस्था विश्वविद्यालय की
ओर से की जायेगी
* वर्ग के सभी सत्रों में प्रशिक्षार्थियों की उपस्थिति अनिवार्य
* वर्ग के दौरान दिया गया गृहकार्य सभी प्रशिक्षार्थियों को करना अनिवार्य
* कार्यशाला का माध्यम- हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेजी
* शोधछात्रों को ०४ क्रेडिट प्राप्त करने का सु-अवसर
अधिक जानकारी हेतु संपर्क करें
श्री भाविनकुमार पण्ड्या (M) 94269 93063
शोध सहायक, प्राच्यविद्या संशोधन एवं प्रशिक्षण केन्द्र,
श्री सोमनाथ संस्कृत युनिवर्सिटी, वेरावल

श्री सोमनाथ संस्कृत युनिवर्सिटी, वेरावल प्राच्यविद्या शिक्षण एवं प्रशिक्षण केन्द्र और राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन, दिल्ली
के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित
साप्ताहिक प्रशिक्षण वर्ग लिपि एवं पाण्डुलिपि विज्ञान
दिनाङ्कः २२ तः २८ जून, २०२४
वर्ग की विशेषता
- भारतीय लिपियों का इतिहास एवं विकास
- पाण्डुलिपियों की लेखनशैली/लेखनपद्धति
- पाण्डुलिपियों के वर्णों के लेखन के साम्य-वैषम्य
- वर्णों के लेखन का प्रशिक्षण एवं अभ्यास
- पाण्डुलिपि-वाचन का प्रशिक्षण एवं अभ्यास
- अप्रकाशित पाण्डुलिपियों की सम्पादनपद्धति
# पंजीकरण की लिंक - https://forms.gle/6d2p7SeA1yhABP4z5
पंजीकरण शुल्क- रू.२५०/-
# वर्ग का समय प्रतिदिन (रविवार के साथ) प्रातः ११.०० से ०१.०० एवं दोपहर ०२.३० से ०५.३० रहेगा।
# शास्त्री-आचार्य कक्षा के छात्र, शोधछात्र, प्राध्यापक इत्यादि भाग ग्रहण कर सकते हैं।
# बाहर से आने वाले प्रशिक्षार्थियों की आवश्यकता के अनुसार निःशुल्क आवास व्यवस्था की जायेगी।
# प्रशिक्षार्थियों के लिए भोजन व्यवस्था विश्वविद्यालय की ओर से की जायेगी, किन्तु भोजन शुल्क प्रतिभागियों को स्वयं प्रदान करना होगा।
# वर्ग के सभी सत्रों में प्रशिक्षार्थियों की उपस्थिति अनिवार्य रहेगी।
# वर्ग के दौरान दिया गया गृहकार्य सभी प्रशिक्षार्थियों को अनिवार्य रूप से करना रहेगा।
- अधिक जानकारी हेतु संपर्क करें
श्री भाविनकुमार पण्ड्या (M) 94269 93063
आकर्षण– पाण्डुलिपि के नमूने तथा लेखनसामग्री की प्रदर्शनी

DIPLOMA IN LIPI & PANDULIPI VIGYAN (REGULAR ONLINE MODE)
ADMISSION FOR 2025-26
प्राच्यविद्या संशोधन एवं प्रशिक्षण केन्द्र (Prācyavidyā Saṃśodhana evaṃ Praśikṣaṇa Kendra)
SHREE SOMNATH SANSKRIT UNIVERSITY, VERAVAL
Important Instructions / आवश्यक सूचनाएँ (ध्यान से सभी सूचनाओं को पढ़कर अग्रिम प्रक्रिया करें।)
Duration : 01 Year
Minimum Eligibility to Apply : 12th or Equivalent in any stream
Fees : 4150/-
1. Name of Programme: Diploma in Manuscriptology
2. Total number of Credits: 09
3. Medium of Instruction: Hindi, Sanskrit & Gujarati
4. Study mode: Online Regular Mode (Evening Classes)
5. Examination: Offline (Written & Internal Examination)
6. Number of Papers: 03
सूचनाएँ -
* यह अभ्यासक्रम १ वर्ष का होगा एवं अभ्यासक्रम का प्रवेश शुल्क रू.४१५० रहेगा।
* अभ्यासक्रम में कुल ०३ पेपर का अभ्यास रहेगा तथा पठन-पाठन का माध्यम गुजराती/हिन्दी/संस्कृत रहेगा।
* परीक्षा में उत्तर की भाषा गुजराती/हिन्दी/संस्कृत रहेगी एवं परीक्षा के लिए न्यूनतम 70% उपस्थिति अनिवार्य होगी।
* इस अभ्यासक्रम का माध्यम Regular (Online) Mode तथा समय सायं ०५.३० से ०६.३० तक रहेगा।
* इस अभ्यासक्रम में B.A./M.A./Ph.D. के छात्र एवं अध्यापक भी प्रवेश ले सकते है।
* प्रवेश के लिए अन्तिम दिनांक - १५-०८-२०२५
पाठ्यक्रम की विशेषताएँ
* प्राचीन भारतीय लेखनकला के इतिहास का परिचय
* ब्राह्मी, शारदा, नेवारी, देवनागरी, मैथिली आदि लिपियों का परिचय एवं लेखन-वाचन अभ्यास
* दक्षिण भारतीय ग्रन्थ, नन्दिनागरी, मोडी, दिगलारी, तेलुगु लिपियों का परिचय एवं लेखन-वाचन अभ्यास
* संस्कृत, पाली, प्राकृत ग्रंथों के पाठों के पंचविधत्व का तथा प्राचीन लेखनकला एवं लेखन सामग्रियों का परिचय
* भूर्जपत्र, ताडपत्र, कागज़ आदि लिप्यासनों के प्रकार, पुष्पिका, संवत्सर-वाचन आदि का ज्ञान
* देश के प्रमुख पांडुलिपि संग्रहालयों का एवं पांडुलिपियों के विवरणात्मक सूचीकरण की प्रविधि का परिचय
* पाठसंपादन प्रविधि एवं सिद्धांतों का तथा वाचनाओं का निर्धारण करने के नियम और आदर्शपाठ के अनुमान का ज्ञान
* पांडुलिपियों के डिजिटाइझेशन का ज्ञान एवं महाभारत, रामायण आदि ग्रंथों की समीक्षित आवृत्तियों का परिचय एवं प्रारूप का ज्ञान
अपना प्रवेश निश्चित करने हेतु इस लिंक पर पञ्जीकरण करें
https://forms.gle/NLhuknCk94faGgnw6
अधिक जानकारी हेतु संपर्क करें
श्री भाविनकुमार पण्ड्या, शोध सहायक 94269 93063






